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तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद अप्रत्याशित और बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब समाप्त हो चुका है। उन्होंने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता लगभग तय हो चुका है, जिस पर इसी वीकेंड तक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस समझौते के तहत ईरान कभी भी परमाणु बम न बनाने की शर्त पर पूरी तरह सहमत हो गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते पर मुहर लगते ही होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार और जहाजों के आवागमन के लिए दोबारा पूरी तरह से खोल दिया जाएगा और अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बहुप्रतीक्षित और बड़े ऐलान के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने उनके दावों की हवा निकाल दी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिकी दावों का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए कहा कि हालांकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के कई अहम मसौदे और हिस्से जरूर तैयार हो चुके हैं, लेकिन ईरान ने अभी तक किसी भी अंतिम समझौते पर अपनी अंतिम सहमति नहीं दी है। उन्होंने साफ शब्दों में तेहरान का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और रेड लाइन्स से किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान अपने आप में ही कई बड़े विरोधाभास और सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ जहां उन्होंने डंके की चोट पर यह कहा कि दोनों देशों ने एक शानदार समझौता कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने इसी डील को बेहद मजबूत लेकिन एक कांसेप्चुअल मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (वैचारिक समझौता ज्ञापन) करार दिया। उनके इस बयान से यह साफ नहीं हो पा रहा है कि यह डील पूरी तरह से पक्की हो चुकी है या अभी सिर्फ शुरुआती और सैद्धांतिक स्तर पर ही है।
इसके अलावा, उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि इस ऐतिहासिक शांति समझौते को क्षेत्र के कई प्रमुख देशों का समर्थन मिल चुका है, जिनमें इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्किये, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र शामिल हैं। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इस पूरी सूची में उन्होंने मुख्य पक्षकार यानी खुद ईरान का नाम ही शामिल नहीं किया।
यह पहली बार नहीं है जब वाशिंगटन की तरफ से ऐसा कोई दावा किया गया है, बल्कि पिछले कई महीनों से लगातार यह कहा जा रहा है कि ईरान के साथ डील बेहद करीब है। जबकि जमीनी हकीकत यह रही है कि इसी दौरान दोनों देशों के बीच घातक हमले और जवाबी सैन्य कार्रवाइयां लगातार जारी रहीं। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले अमेरिकी हवाई हमलों को सिर्फ इसलिए रोक दिया क्योंकि बातचीत आगे बढ़ रही थी, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि दबाव बनाने की नीति जारी रहेगी। इस पूरे मामले में असली अड़चन यह है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं स्वीकार करे, जबकि ईरान की मांग है कि उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए और विदेशों में फ्रीज की गई उसकी अरबों डॉलर की संपत्ति को तत्काल बहाल किया जाए।
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