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अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ी

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर 

चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में उस समय एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई ने पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा मंजूर होने के तुरंत बाद, उन्होंने पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने की घोषणा की है। देश में जहां विभिन्न दल महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण या राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं को अपना आदर्श मानते हैं, वहीं अन्नामलाई ने पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना वैचारिक प्रतीक (आइकॉन) चुना है। उन्होंने कलाम साहब के सिद्धांतों पर आधारित कलाम स्कूल ऑफ आइडियोलॉजी के तहत अपने नए राजनीतिक सफर का आगाज किया है।

अन्नामलाई के इस नए आंदोलन का नाम वी द लीडर रखा गया है। यह आंदोलन उनके द्वारा कोयंबटूर में स्थापित किए जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स के बैनर तले काम करेगा। इस नए अभियान के प्रति लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और घोषणा के महज 10 घंटों के भीतर ही 10 लाख से अधिक लोग इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं, जिसे राज्य की राजनीति में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। तमिलनाडु की राजनीति दशकों से पेरियार, सीएन अन्नादुराई, एम. करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता जैसे पारंपरिक द्रविड़ नेताओं की पहचान आधारित राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में अन्नामलाई द्वारा डॉ. कलाम को अपना वैचारिक प्रतीक चुनना एक बड़ा राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। डॉ. कलाम एक ऐसे सर्वस्वीकार्य नेता रहे हैं, जिन्हें द्रविड़ समर्थक, राष्ट्रवादी, अल्पसंख्यक, अगड़े-पिछड़े वर्ग और विशेषकर युवा वोटर समान रूप से बेहद सम्मान देते हैं। रामेश्वरम के एक साधारण तमिल मुस्लिम परिवार में जन्मे कलाम ने कभी खुद को अल्पसंख्यक की तरह पेश नहीं किया, बल्कि शिक्षा और कड़ी मेहनत के दम पर देश के शीर्ष वैज्ञानिक और राष्ट्रपति बने। अन्नामलाई के मुताबिक, उनका यह आंदोलन किसी खास जाति, धर्म या संप्रदाय को बढ़ावा देने के बजाय देश और राज्य के सामूहिक विकास पर केंद्रित होगा।

अन्नामलाई ने अपनी दीर्घकालिक योजना का खुलासा करते हुए कहा कि यह आंदोलन धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल का रूप लेगा और साल 2031 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल एक मुख्यमंत्री, 234 विधायक या 39 सांसद मिलकर तमिलनाडु की मौजूदा व्यवस्था को नहीं बदल सकते। पूरी व्यवस्था को बदलने के लिए पंचायत स्तर से लेकर शीर्ष पदों तक करीब 30,000 ईमानदार और नए लोगों को तैयार करना होगा। उन्होंने अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि साल 2009 में आईआईएम लखनऊ से एमबीए करने के दौरान उन्होंने दिवंगत अभिनेता-राजनेता कैप्टन विजयकांत के साथ तीन महीने की इंटर्नशिप की थी, जिसने उनके भीतर चुनावी राजनीति की समझ पैदा की।

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